चीन के लद्दाख में मुंह की खाने के बाद जिनपिंग ने खेला तिब्बती सेना पर दांव

चीन के लद्दाख में मुंह की खाने के बाद जिनपिंग ने खेला तिब्बती सेना पर दांव

 

क्राइम वीक न्यूज़ ब्यूरो: कहने को तो चीन के पास करीब 15 लाख सैनिक है  लेकिन पूर्वी लद्दाख में लगातार पिटने के बाद वह  कोई और खतरा मोल लेने से डर रहे है। चीनी सैनिक भारत से सीधे-सीधे लड़ने को तैयार नहीं हो रहे। इसलिए जिनपिंग ने अब तिब्बती सेना पर दांव खेलना शुरू कर दिया है।

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उन्होंने भारत के तिब्बत फोर्स के खिलाफ अपने तिब्बती सैनिकों को ही खड़ा कर दिया है, लेकिन चीन के ये तिब्बती सैनिक चीन से ज्यादा भारत को ही अपना समझते हैं।क्यूंकि चीन के तिब्बत पर कब्ज़े के बाद भी भारत और तिब्बत के रिश्ते गहरे है। इसलिए वो भारतीय सैनिकों से युद्ध करने से हिचक रहे हैं।ये खबर इसलिए भी अहम है, क्योंकि इसमें आजाद तिब्बत की आहट सुनाई दे रही है क्या पता यह उनका चीन के खिलाफ भारत के लिए पहला कदम हो।

एक के बाद एक, करीब तीन महीने से भारत की स्पेशल फ्रंटियर फोर्स ने पूर्वी लद्दाख में चीन की दुस्साहस का करारा जवाब दिया। गलवान से लेकर पैंगोंग तक PLA को धूल चटाई और अब हिमालय की ऊंची चोटियों पर भारतीय सैनिक जा पहुंचे हैं, जहां से चीनी सैनिकों की हरकतों पर सीधी नजर रखी जा रही है।

मतलब बिना लड़े युद्ध जीतने का सपना देखने वाली लाल सेना लद्दाख में बैकफुट पर है, लिहाजा सीमा से करीब डेढ़ हजार किलोमीटर दूर आतिशबाजी कर भारत को डराने का ख्वाब देख रहा है। भारत को असमंजस में ढालने की सोच रहा है।

चीन तिब्बत के पठार को जंग का मैदान बना रहा है क्यूंकि पूर्वी लद्दाख में चीनी सैनिकों को बार-बार भारतीय सेना के तिब्बती सिपाही धूल चटा रहे हैं।  चीन की हर साजिश को हिमालय पर दफ्न कर रहे हैं इसलिए चीन तिब्बत को  अपनी ढाल बना रहा है।

आपको यह भी बता दे की भारत में तिब्बती सैनिकों की स्पेशल फोर्स और विकास रेजीमेंट के जवान बेहद घातक माने जाते हैं।  ये सेना की पैरा कमांडोज के साथ तैयार हुए हैं। लद्दाख के माहौल में पले-बढ़े तिब्बती सैनिक लद्दाख के सैनिकों की तरह ही उच्च पर्वतीय इलाकों में वारफेयर के माहिर हैं। साथ ही चीन के कब्जे वाली अपनी सरजमीं को वापस लेने के लिए तिब्बती शेरों का खून खौल रहा है।

तिब्बत से पलायन कर लद्दाख में बसे सैकड़ों तिब्बती परिवारों की तीसरी पीढ़ी इस समय चीन से अपना घर वापस लेने के लिए सेना के साथ स्पेशल फ्रंटियर फोर्स के पैरा कमांडो के रूप में ड्रैगन के खिलाफ मैदान में लगी हैं।

इस माहौल में PLA के तिब्बती सैनिक मोर्चे पर आना नहीं चाहते, क्योंकि चीन के तिब्बती सिपाही के मन में भारत के प्रति अगाध प्रेम है और उन्हें इस बात का ख्याल है कि भारत में तिब्बती सैनिकों की शहादत पर 130 करोड़ हिंदुस्तानी गर्व करते हैं, जबकि चीन अपने तिब्बती नागरिकों के साथ तालिबान जैसा सलूक करता है। तिब्बत को उनका इस तरह का व्यवहार नागवार है।

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क्राइम वीक न्यूज़ ब्यूरो: खुशी दीक्षित

 

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